आग्नेय महापुराण हमारी परम्परा के उन थोड़े-से ग्रन्थों में है जिन्हें विश्वकोश-पुराण कहा जाता है — जिसमें सृष्टि और प्रलय, मन्त्र और मूर्ति, आयुर्वेद और ज्योतिष, राजनीति और व्याकरण, छन्द और अलंकार, और साथ ही धनुर्वेद — सब एक ही धारा में प्रवाहित हैं। कहा गया है कि यह ज्ञान स्वयं अग्निदेव ने महर्षि वसिष्ठ को प्रदान किया; इसी कारण प्रत्येक प्रसंग "अग्निरुवाच" से आरम्भ होता है — "अग्नि ने कहा।"
इस समूचे महापुराण के भीतर धनुर्वेद का अंश बहुत संक्षिप्त है — केवल