अध्याय १५प्रगति पर
युद्ध के प्रकार और धर्म-युद्ध
नियुद्ध के चार मुख्य प्रकार — धरणीपात, आसुर, नार और युद्ध — तथा उनके लक्ष्य स्पष्ट किए गए हैं। आसुर युद्ध के बत्तीस भीषण उपाय और धर्म-युद्ध के बत्तीस नियम देकर नियमबद्ध व नियम-रहित संघर्ष का अंतर बताया गया है। यह अध्याय आत्मरक्षा और क्रीड़ा-कुश्ती के बीच की सीमा-रेखा — क्या वर्जित, क्या अनुमत — को स्पष्ट करता है।
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मूल श्लोक, अनुवाद और टीका का कार्य चल रहा है। जैसे ही यह अध्याय पूर्ण होगा, यहीं पढ़ने को मिलेगा।
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