मल्लपुराण
चर्चा
अध्याय प्रगति पर

अखाड़े के स्वर और अंग-घात

अखाड़े के पास के स्वर व शकुन का विवेचन कर बताया गया है कि अभ्यास-काल में कौन-सी ध्वनियाँ अशुभ व विचलनकारी हैं। 'दशविध शब्द/क्रिया' से आक्रमण-बचाव का मूल सिद्धांत — प्रहार करो पर स्वयं असावधान न हो — रखकर आगे ३६ प्रकार के अंग-घातों का वर्णन मर्म-कला व प्रहार-विज्ञान की आधारशिला बनता है।

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यह अध्याय अभी तैयार हो रहा है

मूल श्लोक, अनुवाद और टीका का कार्य चल रहा है। जैसे ही यह अध्याय पूर्ण होगा, यहीं पढ़ने को मिलेगा।

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