मल्लपुराण
चर्चा
अध्याय प्रगति पर

मल्लविद्या का आरंभ और मल्लों के लक्षण

विद्यारम्भ के लिए शुभ मुहूर्त, मंडप-रचना, ध्वज-तोरण, वेदी और हवन की विधि का विधान प्रस्तुत होता है। उपदेश का आरंभ 'विधान' से होता है, जिससे अभ्यास अनुशासित, सुरक्षित और फलदायी बनता है। ज्येष्ठी, अन्तरज्येष्ठी, गोपकुल और भविष्य — इन चार श्रेणियों के गुणों से मल्लों का प्रारम्भिक वर्गीकरण स्पष्ट होता है।

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मूल श्लोक, अनुवाद और टीका का कार्य चल रहा है। जैसे ही यह अध्याय पूर्ण होगा, यहीं पढ़ने को मिलेगा।

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