मल्लपुराण
चर्चा
अध्याय प्रगति पर

श्रम (व्यायाम) के लक्षण और भेद

अल्प, अर्ध, पूर्ण और अति — चार प्रकार के श्रम (प्रशिक्षण-तीव्रता), उनके लक्षण व फल बताकर अभ्यास की मात्रा निर्धारित की गई है। किन रोगों व स्थितियों में श्रम वर्जित है यह स्पष्ट कर सुरक्षा-नियम और अनुशासन स्थापित किया गया है; और श्रम के बाद शरीर की पुनःप्राप्ति के उपाय देकर यह अध्याय क्रीड़ा-चिकित्सा का प्राचीन उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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मूल श्लोक, अनुवाद और टीका का कार्य चल रहा है। जैसे ही यह अध्याय पूर्ण होगा, यहीं पढ़ने को मिलेगा।

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